खेल और स्वस्थता

भारतीय नौसेना

असैनिक जगत के अन्य व्यवसायों की तुलना में भारतीय नौसेना नवयुवकों और युवतियों को करियर का बेहतर अवसर प्रदान करती हैI

The Indian Navy

भारतीय नौसेना की परंपराओं के परिपेक्षय में शारीरिक स्वस्थता और टीम भावना महत्वपूर्ण अनिवार्य तत्व हैI नौसेना अपने कार्मिकों की स्वस्थता फिटनेस पर बल देती है इसलिए हम अपने कार्मिकों को पोत और अप तटीय स्थापनाओं पर उच्च दर्जे की खेल सुविधा उपलब्ध करते हैंI हमारे बहुत से पोतो पर जिम्नेज़ियम हैं टीम खेलों को प्रोत्साहित किया जाता है और नौसेना के अंदर बहुत सी खेल चैंपियनशिप आयोजित की जाती हैI

नौसेना जो प्रमुखतः अपने समुद्री कौशल के लिए जानी जाती हैI उसमें बहुत से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों के चैम्पियन काम कर रहे हैंI अनेक नौसेना खिलाड़ियों ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में कई मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया हैI

पुरस्कार

नौसेना के खिलाड़ियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों को भारत सरकार / भारतीय खेल प्राधिकरण और सर्विसेज स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड (एस एस सी बी) द्वारा विधिवत मान्यता दी गई हैI हालही के वर्षों में नौसेना के खिलाड़ियों को अधोलिखित पुरस्कार प्रदान किए गए हैं:-

  • अर्जुन पुरस्कार 2012 :- भारत के राष्ट्रपति ओमकार सिंह, एम सी पी ओ II को निशानेबाज़ी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2012 का अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गयाI किसी नौसेना खिलाड़ी को यह पुरस्कार लगातार चौथे वर्ष दिया गया हैI
  • पदम श्री 2013 :- भारत के राष्ट्रपति ने खेलों (मुक्केबाज़ी) के क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए एन जी डिंको सिंह, एम सी वी ओ एस टी डी I जो वर्ष 2013 में नौसेना की मुक्केबाज़ी टीम के प्रशिक्षक थे, को पदम श्री प्रदान कियाI
  • सेना के सर्वोत्तम खिलाड़ी का पुरस्कार 2013 :- निशानेबाज़ी के क्षेत्र में ओम कर सिंह, एम सी पी ओ II को वर्ष 2013 के सेना के सर्वोत्तम खिलाड़ी के पुरस्कार से सम्मानित किया गया
  • सेना के सर्वोत्तम खिलाड़ी का पुरस्कार 2014 :- हरप्रीत सिंह, एम सी पी ओ II को निशानेबाज़ी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2014 का "सेना के सर्वोत्तम खिलाड़ी का पुरस्कार" दिया गया

साहसिक गतिविधियाँ

साहसिक गतिविधियाँ मानव संसाधन विकास का एक महत्वपूर्ण पक्ष हैंI यह अतिआवश्यक है कि नौसेना के कर्मिक ऐसी गतिविधियों में भाग ले जिनसे उनमें भाईचारे, दल भावना, पहल करना, स्फूर्ति, मानसिक और शारीरिक मजबूती, चरित्र बल जैसी आदतें सुदृढ़ होंI

नौसेना में साहसिक गतिविधियों के इच्छुक और उदीयमान खिलाड़ियों को एक सुनियोजित और व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम के ज़रिए उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता हैI अनेक नौसेना कार्मिकों ने खेलों तथा साहसिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और देश के लिए सम्मान हासिल किए हैंI

साहसिक / पर्वतारोहण गतिविधियाँ

माउंट एवरेस्ट 2004

पर्वतारोहण संसार में 8850 मीटर उँची माउंट एवरेस्ट छोटी पर चढ़ना एक आख़िरी चुनौती समझा जाता हैI 2004 में भारतीय नौसेना तिब्बत होते हुए नॉर्थ फेस के दुर्गम रास्ते से माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के अभियान की शुरुआत की इस अभियान को तत्कालीन रक्षा मंत्री - जॉर्ज फर्नांडिस ने 8 मार्च 2004 को समुद्र तल से 50 मीटर नीचे आई एन एस सिंधु राज से एक अनूठे अंदाज में हरी झंडी दिखाईI भारतीय नौसेना दल में 13 सदस्य थे जिनमें से 5 ने 18 और 19 मई 2004 को दो दिन इस चोटी तक चढ़ाई की एवरेस्ट पर चढ़ने वाली यह विश्व की पहली ऐसी टीम थीI जिसके सभी सदस्य नौसेना से थे इसके अलावा नॉर्थ फेस के रास्ते शिखर पर चढ़ने वाला भारतीय सशस्त्र बलों का यह पहला अभियान था जो एक राष्ट्रीय रेकॉर्ड हैI

दक्षिण ध्रुव

भारतीय नौसेना की टीम 2006 में स्कीइंग करके भौगोलिक दक्षिण ध्रुव पहुँचीI इस टीम ने 100 किलोग्राम से अधिक भार वाले स्लेज खींचते हुए करीब 250 किलोमीटर की दूरी तय की दक्षिण ध्रुव तक पहुँचने के लिए प्रत्येक दिन 10-12 घंटों की सक्रिय स्कीइंग करनी पड़ीI प्रदेश तक पहुँचने में कठिनाई, प्रतिकूल मौसम, और भू- प्रादेशिक परिस्थितियों और जमा देने वाले तापमान ने मूश्किले और बढ़ा दीI इस प्रदेस का सबसे गरम तापमान -35 C थाI जहाँ दक्षिण ध्रुव में सबसे उँचीं जगह 3200 मीटर की है, वहीं प्रभावी तुंगता पतली वायुमंडलीय परत और ओज़ोन छिद्र के कारण 3800 मीटर है जोखिम के अलावा 3000 मीटर के उँचे तुंगता क्षेत्र से भी पाला पड़ाI इस टीम में 10 सदस्य थे और वे 28 दिसंबर 2006 का 02.00 बजे (आई एस टी) भौगोलिक दक्षिण ध्रुव पहुँचेI निम्नलिखित रिकॉर्ड कायम हुए:-

  • दक्षिण ध्रुव में स्कीइंग करके पहुँचने वाली प्रथम भारतीय टीमI
  • दक्षिण ध्रुव में पहुँचने वाले प्रथम भारतीय एवरेस्ट पर्वतारोहीI
  • दक्षिण ध्रुव में 1912 के बाद स्कीइंग करके पहुँचने वाली पहली सशस्त्र बल की टीमI

उत्तर ध्रुव

इस चुनौती का सामना करने के लिए इस दस-सदस्यीय टीम को कठिन प्रशिक्षण और शारीरिक एवं मानसिक अनुकूलन से गुज़रना पड़ाI यह यात्रा कठिन और पीड़ादायक थी और अधिकांश दिनों में मौसम प्रतिकूल थाI टीम ने सारी बाधाएँ साहस, दृढ़ निश्चय और सच्चे धैर्य से पर कीI उत्तर ध्रुव की इस सफल साहसिक अभियान के साथ ही निम्नलिखित रिकॉर्ड बने:-

  • तीनों ध्रुवों तक पहुँचने वाला विश्व का पहला संगठनI
  • भौगोलिक उत्तर ध्रुव तक स्कीइंग करके पहुँचने वाली प्रथम भारतीय टीमI
  • दोनों ध्रुवों तक स्कीइंग करके पहुँचने वाली प्रथम भारतीय टीमI
  • सभी ध्रुवों पर पहुँचने वाले प्रथम भारतीयI

माउंट कामेट अभियान (7756 मीटर)

पूर्वी नौसेना कमान की एक 13 सदस्यीय टीम ने 09 मई 16 से 11 जून 16 तक गढ़वाल हिमालय के दो शिखरों, माउंट कामेट (7756 मीटर) और माउंट एबी गैमिन (7355 मीटर) पर चढ़ाई के चुनौती भरे अभियान का बीड़ा उठायाI टीम ने दोनों शिखरों पर क्रमशः 02 जून 16 और 04 जून 16 को चढ़कर अभूतपूर्व सफलता हासिल कीI भारत का तीसरा सबसे उँचा शिखर माउंट कामेट पर्वतारोहण के लिए खुला हैI इस प्रकार, नौसेना की ध्वज देश की भौगोलिक सीमाओं में उच्चतम बिंदु पर स्थापित की गई हैI

माउंट सातोपंथ (7203 मीटर) के लिए अभियान

ले. कमांडर विनीत दोषी के नेतृत्व में एक 12- सदस्यीय टीम ने 17 जून 16 को गंगोत्री क्षेत्र में माउंट सातोपंथ पर सफलतापूर्वक आरोहण कियाI इस दल में सभी नौसेना कमानों के प्रतिनिधित्व शामिल थेI उतरने के दौरान निकट की एक अनाम चोटी (प्वाइंट 6020) पर भी दल द्वारा आरोहण किया गयाI