एयर स्क्वाड्रन में जीवन

भारतीय नौसेना

असैनिक जगत के अन्य व्यवसायों की तुलना में भारतीय नौसेना नवयुवकों और युवतियों को करियर का बेहतर अवसर प्रदान करती हैI

The Indian Navy

एक कैरियर के रूप में नौ-विमानन

प्रसिद्ध अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और चंद्रमा पर उतरने वाले प्रथम व्यक्ति नील आर्म स्ट्रॉंग से जब उनके शानदार कैरियर की सर्वाधिक संतोषप्रद और यादगार उपलब्धि के बारे में पूछा गया I तो सभी में यही सोचा था कि वे अपोलो II ल्यूनर मॉडयूल में चंद्रमा पर उतरने को अपने सर्वाधिक यादगार उपलब्धि के रूप में व्यक्त करेंगे परंतु जब उन्होंने यह कहा कि उनके लिए सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण और इससे भी अधिक संतोषप्रद उपलब्धि प्रथम घनघोर-अंधेरी रात में समुद्र में उपर नीचे हो रहे वायुयान वाहक पोत के डेक पर उतरना था तो सभी चकित रह गएI

नौ-विमानन हमेशा से वीर नायकों का इतिहास रही है और एक नौ विमानक केजीवन को मीडिया के मध्यम से खूब प्रचारित किया गया हैI इस मोहक और बेहद महत्वपूर्ण पेशे के इए सतर्कता और नियंत्रित आवेग के साथ सच्चे धैर्य और निरंतर एकाग्रता बनाए रखने की आवश्यकता होती हैI इस पृथ्वी पर काफ़ी कम लोग एक विमानक का जीवन जीने का साहस जुटा सकते हैं और इससे भी कम लोग नौ विमानक का जीवन, जो स्थल, समुद्र और वायु तीनों आयामों में क्रियाशील रहता हैI

नौ विमानक का जीवन सब लेफ्टिनेंट के लिए अनिवार्य कोर्सों को पूरा करने के उपरांत पयलट, प्रेक्षक अथवा तकनीकी अफ़सर के रूप में विमानन में विशेषज्ञता के लिए अपनी इच्छा जताने के साथ शुरू होता हैI पायलट के लिए स्वीकृति देने वालों को सर्वप्रथम सघन चिकित्सा स्वस्थता परीक्षण से गुज़रना पड़ता है और इसके उपरांत उन्हें उड़ान पूर्व प्रशिक्षण के लिए दक्षिण नौसेना कमान, कोच्चि स्थित नौसेना वायु कर्मी (एस एफ एन ए) स्कूल भेजा जाता हैI इस प्रशिक्षण में आवश्यक ग्रेड प्राप्त करने वाले पायलट प्रशिक्षुओं को फिर वायुसेना अकादमी डुडीगल अथवा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (आई जी आर यू ए) में आरंभिक प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता हैI इस स्टेज को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, पायलटों को लड़ाकू (फाइटर), नियत पंखी (फिकसड-विंग, और घूर्णी पंखी (रोटरी विंग) जैसी तीन शाखाओं में वर्गीकृत कर दिया जाता हैI फाइटर और नियत पंखी के लिए चयनित प्रशिक्षु पायलट भारतीय वायु सेना (आई ए एफ) के साथ बने रहते हैं और क्रमशः उन्नत जेट ट्रेनर और डार्नियर पर अगला प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं जबकि घूर्णी पंखी के लिए चयनित पायलट चेतक हेलिकॉप्टर पर आवश्यकतानुसार परिवर्तन के तौर पर हेलिकॉप्टर प्रशिक्षण स्कूल (एच टी एस) चले जाते हैंI अपने प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद इन पायलेटों को देश भर में फैले भारतीय नौसेना एयर स्क्वाड्रनों में तैनात किया जाता हैI फाइटर स्क्वाड्रन में दो मिग 29 K (आई एन ए एस 300 और 303) और एक हॉक (आई ए एन एस 551) यूनिट है जो क्रमशः गोवा और विशाखापट्नम में स्थित हैI मिग 29 k स्क्वाड्रन एक पोतारूढ़ स्क्वाड्रन है जो वायुयान वाहक आई एन एस विक्रमादित्य और तटीय बेस दोनों से ऑपरेट करने में सक्षम है जबकि हॉक स्क्वाड्रन पूरी तरह केवल तट से ऑपरेट कर सकता हैI

सभी फाइटर पायलट सर्वप्रथम आई एन एस एस 551 ज्वाइन करते हैं और आई एन ए एस 300 में मिग वायुयानों पर कनवरजन के लिए चुने जाने से पहले नेवल ओरियेंटेशन फ्लाइंग करते हैंI और अंततः उनकी नियुक्ति मिग ओप्रेशनल स्क्वाड्रन आई एन ए एस 303 के लिए होती हैI मिग वायुयानों पर ऑपरेशनल कनवर्जन एक व्यापक लेकिन सिखाने वाली हैI जिसके अंतर्गत वायु समाघात भूमिकाओं, प्रहार और हथियार डिलीवरी प्रोफाइल, हवा से हवा में पुनः ईधन भरना और सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण परंतु नौसेना अंतर वाहक अवतरण योग्यता में प्रशिक्षण शामिल हैI फाइटर स्क्वाड्रन, नौसेना के बेड़े की तलवार की नुकीली का धार काम करती है और लंबी दूरी के हमले करने के साथ साथ समुद्र में बेड़े को अभेघ सुरक्षा प्रदान करती हैI

नियत पंखी पायलटों को डार्नियर ऑपरेशनल फ्लाइंग प्रशिक्षण के लिए आई एन ए एस 550 में नियुक्त किया जाता है, जिसके सफलतापूर्वक समापन के उपरांत, कुछ पायलटों को ऑपरेशनल डार्नियर स्क्वाड्रन (आई एन ए एस 310, 311, 318) में स्थानांतरित कर दिया जाता हैI ये सभी स्क्वाड्रन क्रमशः गोवा, विशाखापट्नम और पोर्टब्लेयर से विशेष सूचना को प्राप्त करनेI इलेक्ट्रॉनिक युद्धपद्दति भूमिका को समझने का कार्य करती हैI शेष पायलेटों को लंबी दूरी के समुद्री सर्वेक्षण और पनडुब्बी-रोधी युद्धपद्दति स्क्वाड्रन में तैनात किया जाता हैI आई एन ए एस 315 और 312 ए स्क्वाड्रन उन्नत, चौड़े- आकार वाले बहु भूमिका निभाने वाले वायुयानों आई एल-38 और बोइंग पी 81 को ऑपरेट करते हैंI नियत-पंखी स्क्वाड्रन भारतीय नौसेना की आँख और कान हैंI जो व्यापक महासागरीय क्षेत्र में हमारे आधिपत्य को कायम रखने के लिए निरंतर गश्त करती हैंI

हेलिकॉप्टर पायलटों को आई एन ए एस 561 (एच टी एस) में हेलिकॉप्टर फ्लाइंग प्रशिक्षण दिया जाता हैI जहाँ उन्हें घूर्णी पंखी (रोटरी विंग) के सूक्ष्म भेदो के बारे में पढ़ाया जाता हैI हेलिकॉप्टर ट्रेनिंग स्कूल (एच टी एस) से सफलतापूर्वक ग्रेजुएट होने के उपरांत, इन पायलटों को तटवर्ती क्षेत्रों में स्थित चेतक यूनिटों में तैनात किया जाता हैI यहाँ ये पायलट बेड़े की सहयता कर, आकस्मिक चिकित्सा में मदद पहुँचकर, वी आई पी के साथ गंभीर रूप से आवश्यक खोज और बचाव अभियानों में मदद करके अपने कौशल ज्ञान को निखारते हैंI इन कार्यों के लिए वे विविध परिस्थितियों में तट बेस, बड़े तथा छोटे पोत और ऑयल रिग से ऑपरेट करते हैंI एक बार जब इन पायलटों को एकल इंजन चेतक पर कम करने का पर्याप्त अनुभव हासिल हो जाता हैI तब इन्हें सी विंग (आई एन ए एस 330 और 336), कामोव 31 (आई एन ए एस 339) कामोव 28 (आई एन ए एस 333) जैसे उन्नत बहु इंजन हेलिकॉप्टरों और उन्नत लाइट हेलिकॉप्टर (आई एन ए एस 322) के लिए नियुक्त किया जाता हैI इन स्क्वाड्रनों के बेस मुंबई, कोच्चि, गोवा और विशाखापट्नम में स्थित है और पोतारूढ़ स्क्वाड्रन होने के कारण बहुत बार ये वायुयान वाहक पोत के साथ साथ विध्वंसक डिसट्रायर) और फ्रीगेट से ऑपरेट करते हैंI सी किंग और कामोव 28 दोनों पनडुब्बी रोधी युद्ध हेलिकॉप्टर बेड़े की सुरक्षा करते समय सक्षम पनडुब्बी खोज-ध्वंशक बने रहते हैंI कामोव 31 एक उन्नत एयरबोर्न पूर्व चेतावनी हेलिकॉप्टर है जिसने बेड़े के चारों और चौकस रहने और समय पर प्रभावी क़ार्रवाई करने की दिशा में नौसेना की ताक़त में अकस्मात वृद्दी कर दी हैI उन्नत लाइट हेलिकॉप्टर (ए एल एच) स्वदेश में विकसित उन्नत और आधुनिक हेलिकॉप्टर है जो लंबी दूरी तक खोज और बचाव तथा वाहक पोत पर डिलीवर करने जैसे कुछ कार्य सहित बहु-भूमिका निभाने में सक्षम हैI वरिवढ़ता और कार्य अनुभव के आधार पर कुछ पायलटों को फ्लाइंग अनुदेशक कोर्स अथवा प्रायोगिक परीक्षण पायलट कोर्स पर भी जाने का अवसर प्राप्त होता हैI

‘प्रेक्षक’ क़ैडर का चयन करने वाले अफसरों को कोच्चि स्थित प्रेक्षक स्कूल में आरंभिक कोर्स पर भेजा जाता हैI यह कोर्स बहुत व्यापक परंतु रूचि कर होता हैI इस कोर्स में आवश्यक ग्रेड प्राप्त करने वाले अफसरों को हथियार और सेंसर विशेषज्ञ के रूप में सी किंग या कामोव हेलिकॉप्टर, आई एल 38 या पी 81 वायुयान पर अगले संक्रियात्मक प्रशिक्षण के लिए चयनित किया जाता हैI प्रेक्षक कई प्रकार की ड्यूटियों और ज़िम्मेदारियों को निभाते हैं, इस कारण किसी भी मल्टी-क्रू मिशन में प्रेक्षक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती हैI प्रत्येक ए एस डब्लू आई डब्लूI समुद्री गश्ती मिशन की सफलता या असफलता उन पर निर्भर करती हैI वरिष्ठता के आधार पर कुछ प्रेक्षकों को क्यू एन आई कोर्स अथवा संचार, पनडुब्बी रोधी युद्धपद्दति या गनरी में विशेष कोर्सों पर भेजा जाता हैI लक्ष्य का निर्धारण करने, निष्कर्ष निकालने, विश्लेषण करने और चिन्हित करने जैसे संबंधित कार्यों सहित किसी लक्ष्य के अनुसरण की समूची प्रक्रिया नौसेना प्रेक्षक के अधकर क्षेत्र में आती हैI

विमानन क्षेत्र के तकनीकी अफसरों को कोच्चि स्थित नौसेना विमान प्रौद्योगिकी संस्थान (एन आई ए टी) में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता हैI सफलतापूर्वक कोर्स को पूरा करने के उपरांत उन्हें नौसेना के कई वायुयान बेड़ो में वर्गीकृत कर दिया जाता है और फिर ऑन- टाइप योग्यता के लिए संबंधित स्क्वाड्रन में नियुक्त किया जाता हैI किसी दिए गए समय में वायुयान की अधिकतम सेवा और उपलब्धता को देखा जाए तो ये अफ़सर नौ विमानन के लिए रीढ़ की हड्डी के समान हैंI ये तकनीकी अफ़सर वायुयान के रख रखाव संबंधी सभी पहलुओं के लिए उत्तरदायी होते हैंI जिनमें पावर प्लांट, उन्नत हथियार / सेंसर और क्रांतिक वैमानिकी कुछ गिने-चुने नाम हैंI इस बेहद महत्वपूर्ण और काफ़ी संतोषप्रद कार्य में, प्रत्येक कार्य के लिए वायुयान को युद्ध के लिए तैयार रखते हुए, तट के साथ-साथ जलयान से दैनेदिन आधार पर अत्याधुनिक उपस्करों का संचालन करना और विविध स्थानों से ऑपरेट करने में आ रही कठिनाइयों के अनुरूप अपने आप को ढालना शामिल हैंI तकनीकी अफसरों का पर्याप्त अनुभव के आधार पर देश भर में स्थित आई आई टी द्वारा विशेष क्षेत्र में स्नातकोत्तर कोर्स के लिए चयन भी किया जाता हैI

नौ-विमानक के समपरिवर्तन के प्रत्येक स्टेज पर कड़े मानकों का होना इस बात को सुनिश्चित करता है कि ऑपरेश्नल स्क्वाड्रन में शामिल होने से पूर्व अफसरों को व्यापक और बहु स्तरीय प्रशिक्षण से गुजरा जाए और उन्हें अच्छी तरह हर कसौटी पर परखने के उपरांत सर्वोत्तम में से सर्वोत्तम को ही चुना जाएI एक स्वस्थ और कुशल मस्तिष्क, सुस्पष्ट अभिव्यक्ति, अत्यधिक दबाव में भी धैर्य न खोना, स्थितियों के अनुरूप अपने आप को शीघ्र ढालने की क्षमता और एक परिधि से बाहर जाकर सोचने की योग्यता जैसी कुछ विशेषताएँ हैं जो अत्याधुनिक मशीनों को ऑपरेट कर रहे इन निपुण अफसरों को परिभाषित करती हैI